2 - यीशु का बपतिस्मा

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विवरण

बपतिस्मा ईसाई लोगों को अपने धार्मिक आधारों से और मानव इतिहास की सब से मत्त्वपूर्ण घटना से जोड़ता है जो घटना यीशु की हमारे पापों के लिए क्रूस पर मृत्यु है | जब धर्मदूत यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने यीशु का दीक्ष स्नान दिया, आकाश से एक स्वर आया: “तू मेरा प्रिय पुत्र है, मैं तुझ से प्रसन्न हूं” | यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला पापों से मुक्त करने के लिए पछतावे के बपतिस्मे का धर्मोपदेश करता था | यूहन्ना को धार्मिक प्रचार-प्रसार करते हुए सुन कर, बहुत से लोगों ने अपने पापों को स्वीकृत करने, पछताने और बपतिस्मा लेने के लिए आए हुए थे | यूहन्ना ने उन से कहा: “मेरे बाद वह आने वाला है, जो मुझ से शक्तिमान है; मैं इस योग्य नहीं कि झुक कर उसके जूतों का बन्ध खोलूं। मैं ने तो तुम्हें पानी से बपतिस्मा दिया है पर वह तुम्हें पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देगा” | इस लिए जब यूहन्ना ने यीशु को नदी में बपतिस्मा दिया और यीशु पानी से निकल रहा था आकाश खुल गए और भगवान का स्वर ने कहा : “तू ही मेरा प्रिय पुत्र है, में तुझ से प्रसन्न हूँ” | पवित्र आत्मा एक कबूतर के रूप में यीशु के ऊपर उतर आया जिस से यशायाह की भविष्यवाणी पूरी हो जाए (यशायाह ११:२, ४२:१)| दूसरे दिन जब यूहन्ना ने यीशु को सामने आते हुए देखा तो इस ने चिल्लाया: “देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है।” (यूहन्ना १:२९ ) | यूहन्ना ने कहा: “मैं ने आत्मा को कबूतर की नाईं आकाश से उतरते देखा है, और वह उस पर ठहर गया।” | और मैं तो उसे पहिचानता नहीं था, परन्तु जिस ने मुझे जल से बपतिस्मा देने को भेजा, उसी ने मुझ से कहा, कि जिस पर तू आत्मा को उतरते और ठहरते देखे; वही पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देनेवाला है। और मैं ने देखा, और गवाही दी है, कि यही परमेश्वर का पुत्र है॥(यूहन्ना १:३३-३४) |