4 - बीज बोने वाले की दृष्टांत कथा

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विवरण

जब किसान अपनी अमूल्य उन्नत बीज बोने के लिए क्षेत्र पर आता है वह सब से पहिले विश्वास करना चाहता है कि भूमि इन को लेने तैयार है, ताकि वह ज्यादा उपज दे सके | इस दृष्टांत कथा में जो यीशु ने बताया है, ऐसा लगता है कि बीज बोने वाला हर तरह की भूमि पर दाने फैलाता है : कुछ बीज पत्थर पर, काँटों के बीच, सजीव मार्ग के समीप, और कुछ दाने अच्छी भूमि पर | बीज बोने वाला जरूर जानता था कि न हर बीज अंकुरित हो जाएगा, कई वंध्य रहेंगे | वह यह कहता है कि सब से पहिले हम को बीज बोने वाले को और दाने को पहचानना चाहिए | इस लिए कि यीशु स्वयं दृष्टांत कथा बताता है तो वह अपने आप ही को मानता है | बीज यह प्रभु का शब्द है | और भूमि के चार प्रकार क्या है? यह दृष्टांत कथा हमारे जीवन की ओर, हमारी मानवता की ओर तथा हमारे हृदयों की ओर संकेत दे रहा है | हम अपने आप से तब एक प्रश्न पूछें कि क्या, बीज बोने वाला अपने दाने गवाता है क्या, इन को हवा में उड़ाकर? यीशु बीज बोने वाले की कुछ और मत है | इस को पूरा विश्वास है कि इस के बीजों में से कई बीज अच्छी भूमि में गिर पड़ेंगे और अनुसारी ढंग से इस को सौ गुना लाभ होगा | यह दृष्टांत कथा हमारे बीच कुछ बदलता है और वह है अपने जीवन को, अपने मानव आधार को, अपने हृदय को प्रभु का बीज स्वीकार करने के लिए किस तरह तैयार करें | संभव है कि अपना दिल खोलना और इस में वह भगवान का बीज प्राप्त करना जो प्रभु ने अपने पुत्र यीशु के द्वारा भेज दिया है हम पर निर्भर है |