5 - नेक सामरी की दृष्टांत कथा

दृश्य : 576

विवरण

मेरा पड़ोसी कौन है? इस प्रश्न का उत्तर हम सब को स्पष्ट लगता है | यह हमारा पड़ोसी, हमारे इलाक़े के लोग, हमारे राजनीतिक साथी, हमारे साथ एक ही नगर तथा एक ही देश में निवास करनेवाले हैं | यदि हम मार्ग के किनारे किसी लूटे हुए आदमी को देखेंगे और इस व्यक्ति में आपने पड़ोसी को पहचान पाएँगे, तो हम इसे सहायता दे सकते हैं | परन्तु यीशु ने पड़ोसी का बिलकुल दूसरा चित्र बनाया है | यदि आप का दृष्टांत कथा पढ़ने का साहस होगा तो ये पाँच बिंदु आप को सोचने के लिए बहुत लाभदायक लगेंगे: १ – नेक सामरी ने उस से सहानुभूति राखी और उस ने इस के अनुसार किया | २ – मारे हुए आदमी के समदेशी से घृणा होने के बावजूद भी नेक सामरी अंधविश्वास को दूर किया | ३ – नेक सामरी ने मारे हुए आदमी की चिकित्सा का सारा खर्चा अपने जेब से चुकाया बिना किसी आशा के कि उस का पैसा उस को कभी वापिस मिलेगा | ४ – नेक सामरी ने अपनी अच्छी प्रतिष्ठा पैदा की थी इस लिए यात्रा निवास के मालिक ने इस पर विश्वास रखा और इस की इच्छा पूरी की है | ५ – नेक सामरी बहुत ही विशालहृदय आदमी था और शायद मारे हुए आदमी के देखभाल की वजह से जब तक वह फिर अपने पैरों पर खड़े न हो जाए, इस को आर्थिक कठिनाइयों पहुँचाई | जब यीशु ने अपनी दृष्टांत कथा को समाप्त किया तो विधिवेता जिस ने सवाल पूछा चुप रह गया और समझ लिया कि वह कभी इस तरह का परखा न लिया होता | और हम – हम इस को ले सकते? मैं प्रभु की सहायता से ले पाऊँगा |