6 - प्रभु की प्रार्थना

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विवरण

आप से कभी हुआ है कि जीवन के सारे उत्तरदायित्व आप के ऊपर आ पड़ें और भारी बोझ की तरह दबाएँ और आप के लिए चिंता, घबराहट और पीड़ा पहुँचाएं ? क्या दुनिया इस महान सृष्टि की आयोजना में एक धुल के टुकड़े को जो हम हैं देखेगी ? हम इतना अल्प हैं कि हवा का एक झोंक या मुंह से एक फूँक हो और हम लुप्त हो जाएँगे | भगवान का इस सब में क्या विचार है? हम इस के लिए कितना महत्त्वपूर्ण हैं? यीशु कहता है कि हम महत्त्वपूर्ण हैं | यीशु हम को सिखाता है कि किस तरह प्रभु से प्रार्थना करनी चाहिए और किस तरह इस को संबोधित करना चाहिए | और जो सब से बढ़िया है, वह हम को भगवान से अपने पिता स्वरूप व्यवहार करना सिखाता है | पिता! वह तो हर सांस में हमारे साथ है | उस का राज्य है |वह हम को अपना भाग बनाना चाहता है वह हम को सृष्टि की आयोजना में सम्मिलित करना चाहता है | यीशु ने अपने बारह छात्राओं को प्रार्थना करने सिखाया, जो उन के जीवन को परिवर्तित किया है | और वह हमारी जिंदगी भी परिवर्तित कर सके |