3 - कुँवें के पास एक औरत

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विवरण

यहूदिया से गलील तक सब से सीधा मार्ग सामरिया में से जाता है | बहुत से यहूदी लोग सामरिया में से जाने को राज़ी नहीं थे क्योंकि वे सामरिओं को पसंद नहीं करते थे | इसी मार्ग पर जाते हुए यीशु अपने छात्रों के साथ एक गाँव के पास आए जिस का नाम सूखार था जहां याकूब निवास करता था जिस ने अपने पुत्र यूसफ को भूमि दी थी | याकूब का कुआं वहीं था | यीशु यात्रा के कारण थका हुआ था और दोपहर को कुएं के पास थोड़ा आराम करने के लिए बैठ गया | जब एक सामरी औरत कुँवें से पानी भरने के लिए आई, इस ने अपना पानी यीशु के करीब रखा | यीशु ने इस औरत से पूछा कि “मुझ को पानी पिलाओ” | नारी आश्चर्यचकित हुई और बोली: “तू यहूदी होकर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है?” यीशु ने जवाब दिया: “यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।” | “जिंदगी का पानी” कहते हुए यीशु क्या मानता है? बाद में इन की बातचीत का विषय औरत की निजी जिंदगी से देवगृह पूजा की समस्याओं पर आया है | यीशु ने कहा “हे नारी, मेरी बात की प्रतीति कर कि वह समय आता है कि तुम न तो इस पहाड़ पर पिता का भजन करोगे न यरूशलेम में। तुम जिसे नहीं जानते, उसका भजन करते हो; और हम जिसे जानते हैं उसका भजन करते हैं; क्योंकि उद्धार यहूदियों में से है। परन्तु वह समय आता है, वरन अब भी है जिस में सच्चे भक्त पिता का भजन आत्मा और सच्चाई से करेंगे, क्योंकि पिता अपने लिये ऐसे ही भजन करने वालों को ढूंढ़ता है।” | औरत ने उत्तर दिया: “मैं जानती हूं कि मसीह जो ख्रीस्तुस कहलाता है, आनेवाला है; जब वह आएगा, तो हमें सब बातें बता देगा।” | यीशु ने कहा: “मैं जो तुझ से बोल रहा हूं, वही हूं॥ मैं ही मसीह हूँ ” | यीशु क्या मानता था जब कह रहा था कि सच्चे भक्त पिता का भजन आत्मा और सच्चाई से करेंगे ?